अफगानिस्तान में तालिबान का मुकाबला करने में कैसे असफल हुआ पंजशीर?

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प्रतीकात्मक फोटो.

पंजशीर घाटी में एक बूढ़ा व्यक्ति अफगानिस्तान में तालिबान के हमलों के खिलाफ अंतिम प्रतिरोध के करने वाले सेनानियों का दुखद वर्णन करता है: “उनमें से बहुत सारे थे.” अब्दुल वजीद खेंज गांव में एक बंद दुकान के दरवाजे के सामने झुके, फिर कहा कि सितंबर में राजधानी काबुल के उत्तर में घाटी के मुहाने पर समूह की सेनाएं एकत्रित हुईं. संकरी घाटी से गुजरते हुए तालिबान के दर्जनों बख्तरबंद वाहनों का नजारा उनकी यादों में ज्वलंत हो जाता है. उन्होंने कहा, “हम और कुछ नहीं कर सकते थे.” 

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तीन दिनों तक उनके गांव और राष्ट्रीय प्रतिरोध बल (NRF) यानी पंजशीरी सेनानियों और पराजित राष्ट्रीय सेना के लोगों के मिलेजुले बल,  ने घाटी के ऊपर ऊबड़-खाबड़ चट्टानों से “भारी हथियारों से” गोलीबारी की थी. तालिबान के एक दर्जन से अधिक वाहनों के जले और मुड़े हुए अवशेषों की मलबा उनके गहन संघर्ष का प्रमाण हैं.

लेकिन कट्टर इस्लामवादियों ने अपनी बढ़त जारी रखी. देश के बाकी हिस्सों में जीत हासिल करने और अफगान सेना से जब्त किए गए विशाल शस्त्रागार से लैस होने के कारण उनका हौसला बढ़ा हुआ था.

पंजशीर में छिपे एक एनआरएफ फाइटर ने कहा, “हम हैरान थे, हमें नहीं पता था कि क्या करना है. हमारे पास पर्याप्त हथियार नहीं थे.”

मलास्पा में हरे-भरे खेतों से घिरे एक गांव में 67 वर्षीय खोल मोहम्मद ने कहा कि इस्लामवादियों का काफिला इतना बड़ा था कि ऐसा लग रहा था कि “तालिबान से भरे एक हजार वाहन” बह रहे हों.

पंजशीर के सेनानी प्रतिरोध के लिए एक प्रसिद्ध रहे हैं. वे गृहयुद्ध के दौरान एक दशक तक सोवियत सेना से अपने पहाड़ी घरों की रक्षा करने के लिए संघर्ष करते रहे हैं. और 1996 से 2001 तक वे तालिबान शासन के खिलाफ संघर्षरत रहे हैं.

बर्फ से ढंकी, नुकीली चोटियों से घिरी 115 किलोमीटर (70 मील) की घाटी इसके रक्षकों को प्राकृतिक लाभ प्रदान करती है. लेकिन यह प्रांत अब अलग-थलग नहीं रह गया है. 30 अगस्त को तालिबान ने एक बहु-आयामी हमला शुरू किया था. कुछ निवासियों ने दावा किया कि पंजशीरी सेनानियों की संख्या तीन के मुकाबले एक थी.


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