एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 11 Jun 2021 01:17 AM IST

सार

राज्य सरकार के एक सलाहकार ने कहा कि म्यांमार के कुछ लड़ाके पहले भारत में स्थानीय लोगों को समर्थन से सीमा पार कर गए थे जो बाद में वापस लौट आए।

भारत-म्यामांर सीमा
– फोटो : पीटीआई

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

म्यांमार में सैन्य शासन की कार्रवाई से भागकर हजारों लोग भारत के सुदूर पूर्वी राज्यों में चले गए हैं जिससे वहां के अधिकारियों में चिंता पैदा हो गई है कि यह क्षेत्र अस्थिरता का एक मंच बन सकता है। अधिकारियों में इस क्षेत्र के लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं का इलाका बनने की भी चिंता है। म्यांमार से भारत की 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा लगी है।

बता दें कि तीन भारतीय राज्य मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में फिलहाल म्यांमार के 16,000 लोगों को शरण दी गई है। लेकिन नागरिक समाज समूहों और सरकारी अधिकारियों का अनुमान है कि आगामी महीनों में यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। मिजोरम में म्यांमार के सर्वाधिक लोगों ने शरण मांगी है। यहां अधिकारी लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। उन्हें जानकारी मिली है कि कई लोग तिआउ नदी के घने जंगलों की सीमा से आगे बढ़ रहे हैं।

सलाहकार ने बताया कि हम उन्हें मिजोरम में प्रशिक्षण की अनुमति नहीं देंगे जहां मई के प्रारंभ में करीब 50 लोगों के समूह ने प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था।

नागा व मणिपुर में विद्रोहियों को मिलेगी ऑक्सीजन
नई दिल्ली में एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने बताया कि हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि विद्रोही लोग सीमा पार करते हैं तो ये नागा और मणिपुर में विद्रोहियों को ऑक्सीजन देंगे। ऐसे दो दर्जन समूह सीमा पर काम कर रहे हैं। लंदन स्थित सोस विवि में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ अविनाश पालीवाल ने कहा, म्यांमार सीमा पर वहां के लोगों की आमद भारत के सुदूर पूर्व में गंभीर सुरक्षा हालात पैदा कर सकती है।

भ्रष्टाचार रोधी आयोग का सूकी पर रिश्वत लेने का आरोप
सैन्य शासित म्यांमाक में भ्रष्टाचार रोधी आयोग ने कहा है कि सत्ता से बेदखल की गई नेता आंग सान सूकी ने रियल एस्टेट सौदों में फायदे के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और रिश्वत ली। सूकी के वकीलों ने पहले ही इन आरोपों को खारिज कर दिया था जब सैन्य सरकार ने पहली बार तीन महीने पहले इन मुद्दों को उठाया था।

सूकी के समर्थकों का कहना है कि सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। खबर में कहा गया है कि सूकी पर भ्रष्टाचार रोधी कानून की धारा 55 के तहत आरोप लगाए गए हैं जिसमें उन्हें अधिकतम 15 साल की जेल हो सकती है।

विस्तार

म्यांमार में सैन्य शासन की कार्रवाई से भागकर हजारों लोग भारत के सुदूर पूर्वी राज्यों में चले गए हैं जिससे वहां के अधिकारियों में चिंता पैदा हो गई है कि यह क्षेत्र अस्थिरता का एक मंच बन सकता है। अधिकारियों में इस क्षेत्र के लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं का इलाका बनने की भी चिंता है। म्यांमार से भारत की 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा लगी है।

बता दें कि तीन भारतीय राज्य मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड में फिलहाल म्यांमार के 16,000 लोगों को शरण दी गई है। लेकिन नागरिक समाज समूहों और सरकारी अधिकारियों का अनुमान है कि आगामी महीनों में यह संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। मिजोरम में म्यांमार के सर्वाधिक लोगों ने शरण मांगी है। यहां अधिकारी लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। उन्हें जानकारी मिली है कि कई लोग तिआउ नदी के घने जंगलों की सीमा से आगे बढ़ रहे हैं।

सलाहकार ने बताया कि हम उन्हें मिजोरम में प्रशिक्षण की अनुमति नहीं देंगे जहां मई के प्रारंभ में करीब 50 लोगों के समूह ने प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था।

नागा व मणिपुर में विद्रोहियों को मिलेगी ऑक्सीजन

नई दिल्ली में एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने बताया कि हमारी सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि विद्रोही लोग सीमा पार करते हैं तो ये नागा और मणिपुर में विद्रोहियों को ऑक्सीजन देंगे। ऐसे दो दर्जन समूह सीमा पर काम कर रहे हैं। लंदन स्थित सोस विवि में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ अविनाश पालीवाल ने कहा, म्यांमार सीमा पर वहां के लोगों की आमद भारत के सुदूर पूर्व में गंभीर सुरक्षा हालात पैदा कर सकती है।

भ्रष्टाचार रोधी आयोग का सूकी पर रिश्वत लेने का आरोप

सैन्य शासित म्यांमाक में भ्रष्टाचार रोधी आयोग ने कहा है कि सत्ता से बेदखल की गई नेता आंग सान सूकी ने रियल एस्टेट सौदों में फायदे के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और रिश्वत ली। सूकी के वकीलों ने पहले ही इन आरोपों को खारिज कर दिया था जब सैन्य सरकार ने पहली बार तीन महीने पहले इन मुद्दों को उठाया था।

सूकी के समर्थकों का कहना है कि सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। खबर में कहा गया है कि सूकी पर भ्रष्टाचार रोधी कानून की धारा 55 के तहत आरोप लगाए गए हैं जिसमें उन्हें अधिकतम 15 साल की जेल हो सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here