कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी भी बना हुआ है. अब ज्यादा जोर जीनोम सिक्वेंसिंग पर है, ताकि वायरस के आकार व्यवहार और प्रकार, यानी उसके वेरिएंट की जानकारी ठीक-ठीक पता चले. कोविड की दूसरी लहर से जो हाहाकार मचा उसके पीछे डेल्टा वेरिएंट की भूमिका बताई गई. अब तीसरी लहर को लेकर नजर वायरस के म्यूटेशन और उससे बनने वाले नए वेरिएंट पर है. लिहाजा ज्यादा जोर जीनोम सिक्वेंसिंगपर है. अब तक 41 हजार जीनोम सिक्वेंसिंग हुई है. ये काम 28 लैब कर रही हैं. अब इस काम में प्राइवेट लैब को भी जोड़ने की योजना है. कोशिश है कि अगर कोई नया वेरिएंट बन रहा है, तो उसे समय रहते पहचाना जाए.

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