देश में कोरोना वायरस की थमती रफ्तार के बीच बृहस्पतिवार को एक दिन में संक्रमण के 94,052 मामले मिले हैं। इनमें 68 फीसदी मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मिले हैं। वहीं, बीते एक दिन में 6,148 मरीजों ने जान गंवा दी है, जो अब तक का रिकॉर्ड है।

मौतों में यह उछाल बिहार सरकार द्वारा आंकड़ों में बाजीगरी के चलते आया है। इनमें अकेले बिहार के 3,951 मरीजों की मौत भी शामिल है। हालांकि, एक दिन में 1,51,367 लोग ठीक भी हुए हैं। इलाज करा रहे लोगों की संख्या में 61,372 की कमी दर्ज की गई। देश में अब सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 12 लाख से कम पर आ गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि लगातार 28वें दिन कोरोना वायरस के नए मामलों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या है। इसी के साथ ही कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 2,91,83,121 हो चुकी है, जिनमें से 2,76,55,493 अब तक स्वस्थ हो चुके हैं। अब भी देश में 11,67,952 सक्रिय मामले हैं, जिनका घर या फिर अस्पतालों में इलाज चल रहा है। संक्रमण से अब तक देश में 3, 59,676 लोगों की जान जा चुकी है।

फिलहाल, कोरोना की मृत्युदर 1.20 से बढ़कर 1.22 फीसदी तक पहुंच चुकी है। सात दिन पहले यह दर 1.16 फीसदी थी। हालांकि, ठीक होने की दर भी 94 फीसदी से अधिक है। इसका सीधा असर सक्रिय मामलों पर पड़ रहा है, जिससे सक्रिय दर पांच फीसदी से कम हो चुकी है। मंत्रालय ने बताया कि एक दिन में 20 लाख सैंपल की जांच हुई है, जिनमें 4.69 फीसदी कोरोना संक्रमित मिले हैं। अगर साप्ताहिक दर की बात करें तो यह 5.43 फीसदी है। बीते 17 दिन से यह दर 10 फीसदी से कम बनी हुई है।

मौतें पहले ही हो चुकी थीं, पर सरकारी कागजों में अब शामिल किए गए
दरअसल, बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने मौत की संख्या में संशोधन करते हुए बताया कि उनके यहां 3,951 लोगों की मौत की जानकारी अब मिली है। इन्हें अब सरकारी कागजों में शामिल किया गया है। इसके चलते बिहार में अब तक संक्रमण से मरने वालों की संख्या 9,429 हो चुकी है। हालांकि, विभाग ने यह साफ नहीं किया गया है कि ये मौतें कब हुई हैं।

दरअसल, राज्य में सात जून तक मौत का कुल आंकड़ा 5,458 बताया था, जो 3,951 लोगों की मौतों को जोड़ने के बाद 9,429 हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई लोगों की मौत घर में आइसोलेशन के दौरान हुई। कुछ की मौत घर से अस्पताल जाते वक्त हो गई और कई की कोरोना से ठीक होने के बाद मौत हुई। जांच के बाद ऐसे कई मामलों को जोड़ा गया है।

केरल-बंगाल ने बचाईं ढाई लाख खुराकें, झारखंड ने 34 फीसदी बर्बाद कीं
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि केरल और पश्चिम बंगाल ने मिलकर ढाई लाख से ज्यादा खुराकें बचाई हैं। केरल ने 1.10 लाख और बंगाल ने 1.61 लाख खुराक की बचत की। वहीं, अकेले झारखंड ने 34 फीसदी खुराकें बर्बाद कर दीं। टीका बर्बादी के मामले में झारखंड के बाद 15.79 फीसदी के साथ छत्तीसगढ़ है। मध्यप्रदेश 7.35, पंजाब 7.08, दिल्ली 3.95, राजस्थान 3.91, यूपी 3.78, गुजरात 3.63 और महाराष्ट्र में 3.59 फीसदी खुराक बेकार हो गईं। मई में राज्यों को कुल 7.90 करोड़ खुराक की आपूर्ति की गई थी, जबकि 6.10 करोड़ टीकाकरण हुआ। मई में टीकाकरण अप्रैल की तुलना में कम था। अप्रैल में 9.02 करोड़ खुराक का इस्तेमाल किया गया था जिनमें 8.98 करोड़ खुराक लोगों को दी गईं।

45 या उससे अधिक वालों में 38 फीसदी आबादी को पहली खुराक
अभी तक 45 वर्ष से अधिक आबादी के 38 फीसदी लोगों को कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। त्रिपुरा में यह आंकड़ा 92 फीसदी तक है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 65-65 फीसदी, गुजरात में 53, केरल में 51 और दिल्ली में 49 फीसदी को ही टीका लगा है। 45 वर्ष से अधिक आबादी वालों को तमिलनाडु की पहली खुराक कम मिली है। यहां अभी तक इस आयु वर्ग में 19 फीसदी टीकाकरण हुआ है, जबकि झारखंड और उत्तर प्रदेश में 24-24 और बिहार में यह 25 फीसदी तक दर्ज किया गया है।

यूपी: डब्ल्यूएचओ मानक से 10 गुना ज्यादा जांच, एक दिन में 642 मामले
यूपी सरकार ने दावा किया है कि प्रदेश में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानक से 10 गुना ज्यादा जांच कराई जा रही है, जिसका नतीजा यह है कि प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार यूपी में प्रतिदिन 32 हजार टेस्ट का लक्ष्य था, लेकिन हर रोज औसतन 3 लाख से ज्यादा जांच की गई है। वहीं, बीते एक दिन में प्रदेश में कोरोना के 642 नए मामले मिले हैं। वहीं, 1,231 लोग स्वस्थ हुए, जबकि 82 संक्रमितों की मौत हो गई। प्रदेश में इस समय 12,243 सक्रिय मरीज हैं।

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