टीका लगवाने के बाद अकसर शरीर में सिरदर्द, थकान और बुखार जैसे साइड इफेक्ट नजर आते हैं। इसके चलते कई लोग घबराने भी लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर लोगों में यह लक्षण इस बात का संकेत हैं कि शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र ज्यादा सक्रिय हो रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी टीके के प्रति शरीर ऐसी सामान्य प्रतिक्रिया देता है। हालांकि, ये साइड इफेक्ट क्यों होते हैं, इन्हें समझने के लिए हमें अपने प्रतिरक्षा तंत्र को समझना पड़ेगा।

प्रतिरक्षा के दो हिस्से करते हैं काम
प्रतिरक्षा तंत्र के दो प्रमुख हिस्से होते हैं। इनमें पहला किसी भी घुसपैठिये का पता लगते ही फौरन हरकत में आ जाता है। सफेद रक्त कोशिकाएं (डब्ल्यूबीसी) संबंधित स्थान पर जमा होने लगती हैं। इससे शरीर में सूजन होती है, जो ठंड, दर्द, थकान और अन्य दुष्प्रभावों का कारण बनती है।

प्रतिरक्षा तंत्र की यह त्वरित सक्रियता उम्र के साथ घटने लगती है। यही वजह है कि बुजुर्गों की तुलना में युवाओं में टीकों के साइड इफेक्ट ज्यादा दिखाई देते हैं। लेकिन यह भी सही है कि कुछ टीकों के कारण तुलनात्मक रूप से ज्यादा शारीरिक प्रतिक्रिया दिखाई देती है।

हालांकि, टीकों से हर किसी के शरीर में अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आती है। अगर आपको पहली या दूसरी खुराक के एक-दो दिन बाद तक भी कुछ महसूस नही हुआ तो इसका मतलब यह नहीं है कि टीका काम नहीं कर रहा है। असल में, टीका लगाने के बाद प्रतिरक्षा तंत्र का दूसरा हिस्सा बड़ी खामोशी से संबंधित रोगाणु के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने में जुट जाता है।

लिंफ नोड्स में सूजन
जैसे ही प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय होता है तो कई दफा लिंफ नोड्स (लसिका ग्रंथियों) में कुछ वक्त के लिए सूजन आ जाती है। इसके चलते महिलाओं को कोरोना का टीका लगवाने से पहले नियमित मैमोग्राम कराने की सलाह दी जाती है। ताकि अचानक सूजी नोड को गलती से कैंसर न समझ लिया जाए।

कुछ विरले साइड इफेक्ट भी
आमतौर पर सारे साइड इफेक्ट सामान्य नहीं होते। दुनियाभर में गहन सुरक्षा निगरानी के बावजूद कुछ गंभीर जोखिम सामने आए हैं। मसलन, एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन लगवाने वाली बहुत मामूली आबादी में रक्त का थक्का बना है।

इसी तरह एमआरएनए टीकों (फाइजर, मॉडर्ना) के कारण हृदय में अस्थायी सूजन के विरले साइड इफेक्ट की शिकायत भी मिली है, जिसका पता लगाया जा रहा है। लेकिन नियामकों का कहना है कि इन टीकों का फायदा इस साइड इफेक्ट से कहीं ज्यादा है।

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