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Monday, October 18, 2021
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जिस्म का सौदा: फिल्म इंडस्ट्री से राजनीति और कॉर्पोरेट में घुस गई कास्टिंग काउच की गंदगी, पुरुष भी हो रहे शिकार

4 दिन पहले

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  • #MeToo मूवमेंट के बाद से महिलाएं अपने कड़वे अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर करती नजर आई
  • हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत ने कास्टिंग काउच पर खुलकर बात की

कास्टिंग काउच…. ये टर्म सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसी बेबस औरत की छवि बनती है, जो चकाचौंध से भरी फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में दौलत-शोहरत पाने की होड़ में किसी भी रुतबेदार आदमी के साथ वक्त बिताने को तैयार हो। कुछ दिनों पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत ने कास्टिंग काउच पर खुलकर बात की। वैसे कास्टिंग काउच सिर्फ एक्टिंग इंडस्ट्री तक नहीं, बल्कि उसका दायरा खेल और राजनीति तक आ चुका है। आज के समय में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में भी कास्टिंग काउच की घटनाएं आम हैं। फेम और प्रमोशन की चाह में न जाने कितनी ही लड़कियां इस ‘बंदोबस्त’ का शिकार हो जाती हैं। वहीं वो लड़कियां भी हैं, जो इस जाल का हिस्सा बनने से इनकार करते हुए पीछे रहना चुन लेती हैं।

इस तरह हुई बहस की शुरुआत
24 नवंबर, 1937 को शिकागो ट्रिब्यून की रिपोर्ट में इस शब्द का इस्तेमाल किया गया था। साल 1956 में, एक मैगजीन में भी कास्टिंग काउच एक्सपोज के बारे में लिखा गया। कास्टिंग काउच ऐसे बर्ताव को माना जाता है, जिसमें किसी को काम दिलाने के बदले उससे यौन संबंध बनाने की मांग की जाती है। हॉलीवुड में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी घटनाओं के बाद से लोगों को कास्टिंग काउच के बारे में पता चला। हमारे यहां इसपर बहस की शुरुआत के पीछे दो मुख्य वजह है। साल 2005 में एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में पता चला कि ये नासूर बॉलीवुड में काफी पहले से है। इसमें शक्ति कपूर ने रिपोर्टर से काम पाने के लिए कास्टिंग काउच के लिए तैयार रहने को कहा था। हालांकि दुनिया के सामने आने के बाद साजिश बताकर इससे पल्ला झाड़ लिया था।

वहीं, हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वेनस्टीन पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बाद चले #MeToo मूवमेंट के बाद से ही महिलाएं अपने कड़वे अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर करती नजर आई। ये मामले सीधे-सीधे कास्टिंग काउच के तो नहीं थे, लेकिन किसी खास फील्ड में ताकतवर लोगों के बारे में थे, जो काम दिलवाने के बदले औरतों को अश्लील उम्मीद पाले रखते हैं। इसके बाद से ही जिस काले और भयावह सच से लोग वाकिफ नहीं थे, वो सबके सामने आने लगा। हालांकि मीटू मूवमेंट के बाद कास्टिंग काउच की घटनाओं में कुछ हद तक कमी देखने को मिली है। मशहूर एक्ट्रेस और फिल्म डायरेक्टर नीना गुप्ता ने भी अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘सच कहूं तो’ में कास्टिंग काउच का जिक्र किया है।

क्या संसद भी कास्टिंग काउच से उछूती नहीं?
‘किसी महिला के साथ अगर कास्टिंग काउच होता है तो फिल्म इंडस्ट्री उसे छोड़ नहीं देती, बल्कि उसे उसके बदले काम देती है और उस पर उसे रोटी मिलती है।’ साल 2018 में बड़े- बड़े कलाकारों को अपने इशारों पर नचाने वाली डांस कोरियोग्राफर सरोज खान के इस बयान ने बॉलीवुड से लेकर राजनीति में हंगामा मचा दिया था। उन्होंने कहा था कि कास्टिंग काउच सभी जगह होता है लेकिन लोग बॉलीवुड या फिल्म इंडस्ट्री पर ही इस तरह का लांछन लगाते हैं। इस बयान पर बाद में उन्होंने माफी मांगी थी। इसके बाद अंदाजे लगने लगे कि पॉलिटिक्स में भी कास्टिंग काउच का चलन है। सरोज खान के विवादित बयान के बीच कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने भी चौंकाने वाली बात कही थी। उन्होंने कास्टिंग काउच को ऐसी सच्चाई बताया, जो हर क्षेत्र में देखी जा सकती है। संसद भी इससे अछूती नहीं है।

दशकों से संसदीय राजनीति में सक्रिय एक्टर शत्रुघ्‍न सिन्‍हा ने भी सरोज खान और रेणुका चौधरी से मिलती-जुलती बात करते हुए कहा कि मनोरंजन और राजनीति में भी काम के लिए सेक्स की मांग की जाती है। ये पर्सनल पसंद है इसके लिए किसी को मजबूर नहीं किया जाता।

पुरुष भी होते हैं कास्टिंग काउच का शिकार
कास्टिंग काउच सिर्फ औरतों तक ही सीमित नहीं, बल्कि काम दिलवाने का वादा करते हुए पुरुषों के साथ भी ऐसा हो रहा है। हालांकि ये मुद्दा अभी दबा-छिपा है। इसे लेकर मशहूर एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने भी एक रियलिटी शो के दौरान माना कि पुरुष भी कास्टिंग काउच का शिकार होते हैं। इसके अलावा हैदराबाद के मॉडल कृष्णा मोनाला ने कास्टिंग काउच के बारे में बयान दिया था कि कुछ निर्देशकों ने उन्हें अपने साथ सोने के लिए कहा। वे अकेले ऐसे एक्टर नहीं, इससे पहले गायक सोनू निगम ने भी एक पत्रकार पर फिजिकल रिलेशन बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था।

नौकरी के नाम पर जिस्‍म का सौदा
अगर बात करें प्राइवेट सेक्टर्स की तो औरतों के साथ अच्छी सैलरी के नाम पर शोषण का ग्राफ भी कम नहीं है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग एंड नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग कंपनियों में लगभग 88% महिला कर्मचारियों को जॉब के दौरान किसी न किसी तरह से यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। सेंटर फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया के सर्वे के मुताबिक करीब 50% महिलाओं से अपमानजनक भाषा, फिजिकल कांटेक्ट या उनसे सेक्शुअल फेवर मांगा जाता है। चुनौतियों से दबकर कई लड़कियां काम के बदले अपने जिस्म का सौदा कर देती है लेकिन इसके बाद भी पक्का नहीं होता कि आगे उनकी जॉब सिक्योर रहेगी या नहीं।

साल 2016 में गुड़गांव की एक कंपनी में नौकरी के लिए पहुंची एक लड़की के साथ भी जबरदस्ती अश्लील हरकते करने का मामला सामना आया था। कंपनी के एमडी लड़की को दूसरी ब्रांच दिखाने के बहाने अपनी कार में बैठा लिया। जबरन शराब पिलाने के बाद अश्लील हरकतें करने लगा। एमडी ने ये बात तक कह दी की अगर नौकरी करनी है तो शराब पीने के अलावा सेक्स भी करना होगा। वहीं, कुछ माह पहले मुंबई के घोडबंदर इलाके में कास्टिंग डायरेक्टर्स ने फिल्मों में काम दिलाने के लिए एक एक्ट्रेस से रात गुजारने की मांग की थी। इसपर एक पॉलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इन कास्टिंग काउच से जुड़े डायरेक्टर्स को एक फॉर्म हाउस में पकड़ाकर खूब पिटाई की थी।

मायानगरी की चमक के पीछे छुपे काले अंधेरे से खुदको रखा दूर
बॉलीवुड सिंगर अकांशा शर्मा बताती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में लड़कियों का कास्टिंग काउच का शिकार होना आम बात है। राजस्थान से लेकर बॉलीवुड तक के सफर में कास्टिंग काउच को जाना। इसकी वजह से उन्होंने कई मौके गवाये, लेकिन कभी शॉर्टकट नहीं चुना। हमेशा मुश्किल से मुश्किल रास्ता अपनाने को तैयार रही। भागती-दौड़ती मुंबई के साथ एडजस्ट होना मुश्किल था पर हमेशा मायानगरी की चमक के पीछे छुपे काले अंधेरे से हमेशा खुद को दूर रखने की कोशिश की। अब तक वे 15 से 20 गाने गा चुकी है। शादी में जरूर आना, गोल्ड, अंधाधुन फिल्म्स में मेरे कई गाने खूब वायरल हुए, जिससे उनका हौसला बढ़ता गया।

आखिर कब लगेगा कास्टिंग काउच की घटनाओं पर लगाम?
फिल्म इंडस्ट्री में कई निर्देशकों और अभिनताओं पर काम के दौरान शोषण के आरोप लग चुके हैं। मलयालम फिल्म जगत में कास्टिंग काउच और भेदभाव को लेकर भी जस्टिस हेमा की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। 31 दिसंबर 2019 को जस्टिस हेमा की कमेटी ने मलयालम फिल्म उद्योग में इन मुद्दों के अध्ययन की रिपोर्ट केरल के सीएम को सौंपी थी। इसमें मलयालम फिल्म जगत में कास्टिंग काउच और भेदभाव की प्रथाओं की पुष्टि की थी। जस्टिस हेमा ने एक ट्रिब्यूनल का गठन कर कानून लागू करने की भी मांग की, ताकि मनोरंजन की दुनिया में होने वाले शोषण और कास्टिंग काउच पर लगाम लगाई जाए। लेकिन इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की हुई है। मी टू अभियान के माध्यम से एक्ट्रेस के खुल कर बात करने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग का भी इस तरफ ध्यान गया था। कास्टिंग काउच जैसी परेशानी का सामना करने के लिए कैंपेन शुरू करने की बात सामने आई थी। फिलहाल ये मुद्दा दूसरे किसी बड़े वाकये का इंतजार करता दिख रहा है।

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