न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्‍तव
Updated Wed, 09 Jun 2021 08:15 PM IST

सार

सूर्यग्रहण का काल कुल पांच घंटे का होगा। ग्रहण दोपहर 1:42 मिनट से शुरू होकर शाम 6:41 मिनट तक रहेगा। हालांकि ये सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

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साल का पहला सूर्यग्रहण ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानी 10 जून को पड़ रहा है। इस दिन शनि जयंती भी है। इसलिए सूर्यग्रहण के साए पर शनिदेव का भी अद्भुत संयोग देखने को मिलेगा। 148 साल बाद शनि जयंती व सूर्यग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

साकेत भवन मंदिर के महंत आचार्य प्रवीण बताते हैं कि 10 जून को साल का पहला सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। सूर्यग्रहण का काल कुल पांच घंटे का होगा। ग्रहण दोपहर 1:42 मिनट से शुरू होकर शाम 6:41 मिनट तक रहेगा। हालांकि ये सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जिस वजह से सूतक काल मान्य नहीं होगा। वहीं इसी दिन शनि जयंती व वट सावित्री व्रत का भी संयोग है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर भगवान शनि का जन्म हुआ था। हर साल इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा-अर्चना की जाती है। आचार्य प्रवीण बताते हैं कि सूर्यग्रहण और शनि जयंती एक साथ होने के अलावा इस दिन शनिदेव मकर राशि में वक्री रहेंगे। जहां एक तरफ पिता सूर्यदेव ग्रहण के साए में रहेंगे तो वहीं पुत्र शनि की जयंती मनाई जाएगी।

इस तरह का संयोग 148 वर्ष बाद बना है। इससे पहले 26 मई 1873 को शनि जयंती और सूर्यग्रहण का संयोग बना था। शनि जयंती होने के कारण शनि की ढैया व साढ़ेसाती से पीड़ित जातकों को कल भगवान शनि की पूजा-अर्चना व हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। बताया कि सूर्य का ग्रहीत होना राज्य के सत्ताधारियों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। सत्तादल को विरोधियों से सचेत रहने की आवश्यकता है।

विस्तार

साल का पहला सूर्यग्रहण ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानी 10 जून को पड़ रहा है। इस दिन शनि जयंती भी है। इसलिए सूर्यग्रहण के साए पर शनिदेव का भी अद्भुत संयोग देखने को मिलेगा। 148 साल बाद शनि जयंती व सूर्यग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

साकेत भवन मंदिर के महंत आचार्य प्रवीण बताते हैं कि 10 जून को साल का पहला सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। सूर्यग्रहण का काल कुल पांच घंटे का होगा। ग्रहण दोपहर 1:42 मिनट से शुरू होकर शाम 6:41 मिनट तक रहेगा। हालांकि ये सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जिस वजह से सूतक काल मान्य नहीं होगा। वहीं इसी दिन शनि जयंती व वट सावित्री व्रत का भी संयोग है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर भगवान शनि का जन्म हुआ था। हर साल इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा-अर्चना की जाती है। आचार्य प्रवीण बताते हैं कि सूर्यग्रहण और शनि जयंती एक साथ होने के अलावा इस दिन शनिदेव मकर राशि में वक्री रहेंगे। जहां एक तरफ पिता सूर्यदेव ग्रहण के साए में रहेंगे तो वहीं पुत्र शनि की जयंती मनाई जाएगी।

इस तरह का संयोग 148 वर्ष बाद बना है। इससे पहले 26 मई 1873 को शनि जयंती और सूर्यग्रहण का संयोग बना था। शनि जयंती होने के कारण शनि की ढैया व साढ़ेसाती से पीड़ित जातकों को कल भगवान शनि की पूजा-अर्चना व हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। बताया कि सूर्य का ग्रहीत होना राज्य के सत्ताधारियों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। सत्तादल को विरोधियों से सचेत रहने की आवश्यकता है।

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