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मध्यप्रदेश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित इंदौर जिले में महामारी का प्रकोप घटने के बाद ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) चिकित्सा जगत के सामने नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। रोगियों की नाक, मुंह, आंखों और मस्तिष्क के बाद फेफड़ों और पेट में भी ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।

परमार्थिक क्षेत्र के चोइथराम अस्पताल में पेट रोग विभाग के प्रमुख डॉ. अजय जैन ने बुधवार को मीडिया को बताया, पिछले एक हफ्ते के दौरान हमें ऐसे दो मरीज मिले जिनके पेट में ब्लैक फंगस संक्रमण की पुष्टि हुई है। ये मरीज महीने भर के अंतराल में कोविड-19 से ठीक हुए हैं।

उन्होंने बताया, इनमें 62 वर्षीय पुरुष शामिल था जो हमारे पास आंतों की रुकावट और शौच न होने की शिकायत लेकर आया था। हमने जब उसका ऑपरेशन किया तो पाया कि उसकी छोटी आंत का तीन फीट लम्बा हिस्सा सड़ चुका था। इस हिस्से को काटकर बाहर निकालने के बाद जांच की गई जिसमें ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई।

जैन ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। पेट रोग विशेषज्ञ ने बताया कि दूसरे मामले में 44 वर्षीय पुरुष मल के साथ लगातार खून आने की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था।

उन्होंने बताया, जांच में इस मरीज की छोटी आंत के पहले हिस्से में काले रंग का बड़ा छाला दिखा और आंत की दीवार गली नजर आई। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि ब्लैक फंगस मरीज के अग्नाशय में भी प्रवेश कर चुका है।

उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद इस मरीज के पेट से ब्लैक फंगस संक्रमण हटाया गया और उसकी हालत फिलहाल ठीक है। इस बीच, श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैम्स) के छाती रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रवि डोसी ने बताया, हमारे अस्पताल के दो मरीजों के पेट में ब्लैक फंगस संक्रमण मिला है, जबकि आठ अन्य रोगियों के फेफड़ों में यह संक्रमण पाया गया है। कोविड-19 से उबरे मरीजों में यह नई समस्या सामने आ रही है।

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थानीय अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 500 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इनमें इंदौर के अलावा राज्य के अन्य जिलों के मरीज भी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35 लाख की आबादी वाले इंदौर जिले में 24 मार्च 2020 से लेकर अब तक कोविड-19 के कुल 1.52 लाख मरीज मिले हैं। इनमें से 1,363 की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।

विस्तार

मध्यप्रदेश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित इंदौर जिले में महामारी का प्रकोप घटने के बाद ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) चिकित्सा जगत के सामने नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। रोगियों की नाक, मुंह, आंखों और मस्तिष्क के बाद फेफड़ों और पेट में भी ब्लैक फंगस संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।

परमार्थिक क्षेत्र के चोइथराम अस्पताल में पेट रोग विभाग के प्रमुख डॉ. अजय जैन ने बुधवार को मीडिया को बताया, पिछले एक हफ्ते के दौरान हमें ऐसे दो मरीज मिले जिनके पेट में ब्लैक फंगस संक्रमण की पुष्टि हुई है। ये मरीज महीने भर के अंतराल में कोविड-19 से ठीक हुए हैं।

उन्होंने बताया, इनमें 62 वर्षीय पुरुष शामिल था जो हमारे पास आंतों की रुकावट और शौच न होने की शिकायत लेकर आया था। हमने जब उसका ऑपरेशन किया तो पाया कि उसकी छोटी आंत का तीन फीट लम्बा हिस्सा सड़ चुका था। इस हिस्से को काटकर बाहर निकालने के बाद जांच की गई जिसमें ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई।

जैन ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। पेट रोग विशेषज्ञ ने बताया कि दूसरे मामले में 44 वर्षीय पुरुष मल के साथ लगातार खून आने की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था।

उन्होंने बताया, जांच में इस मरीज की छोटी आंत के पहले हिस्से में काले रंग का बड़ा छाला दिखा और आंत की दीवार गली नजर आई। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि ब्लैक फंगस मरीज के अग्नाशय में भी प्रवेश कर चुका है।

उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद इस मरीज के पेट से ब्लैक फंगस संक्रमण हटाया गया और उसकी हालत फिलहाल ठीक है। इस बीच, श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैम्स) के छाती रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रवि डोसी ने बताया, हमारे अस्पताल के दो मरीजों के पेट में ब्लैक फंगस संक्रमण मिला है, जबकि आठ अन्य रोगियों के फेफड़ों में यह संक्रमण पाया गया है। कोविड-19 से उबरे मरीजों में यह नई समस्या सामने आ रही है।

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थानीय अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 500 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इनमें इंदौर के अलावा राज्य के अन्य जिलों के मरीज भी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35 लाख की आबादी वाले इंदौर जिले में 24 मार्च 2020 से लेकर अब तक कोविड-19 के कुल 1.52 लाख मरीज मिले हैं। इनमें से 1,363 की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।

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