रायपुरएक दिन पहलेलेखक: ठाकुरराम यादव

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67 में से 15 दुकानें ही खुलीं।

शहर के सबसे प्राइम लोकेशन और घने व्यावसायिक क्षेत्र में बना संभवत: प्रदेश का पहला स्मार्ट जवाहर बाजार लीज डीड की शर्तों पर टकराव की वजह से एक साल से सूना पड़ा है और इसके जल्दी खुलने के आसार नहीं हैं। विवाद लीज डीड की शर्तों को लेकर है जैसे-बाजार का मेंटेनेंस लीज के हिसाब से व्यापारियों को करना है, लेकिन ज्यादा खर्च की वजह से वे तैयार नहीं हैं और निगम भी शर्त हटाने पर राजी नहीं है। यही नहीं, लीज के मुताबिक पूरे बाजार का बिजली बिल व्यापारियों की समिति को ही चुकाना है और पूरे कारोबारी इसके विरोध में आ गए हैं।

कुछ और शर्तों को लेकर भी व्यापारी अड़े हैं और निगम भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। इसका नतीजा यह हुअा है कि मालवीय रोड जैसी जगह पर 67 बड़ी दुकानों वाले तथा 20 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किए गए इस मार्केट में सिर्फ 15 दुकानें ही खुल पाई हैं। पूरी कीमत अदा करने के बाद भी पिछले 10 माह से 35 से ज्यादा व्यापारियों ने दुकानें ही खोलने से इंकार कर दिया है। नतीजा यह हुअा है कि पहले स्मार्ट बाजार के सामने ठेले-खोमचों का कब्जा रहने लगा है।

नगर निगम ने पुराने जवाहर बाजार को तोड़कर 24 करोड़ रुपए में स्मार्ट जवाहर बाजार तैयार किया और तामझाम के साथ इसे शुरू किया गया। पुराने 67 पुराने कारोबारियों को यहां रियायती दरों पर दुकानें दी गई हैं। कीमत अदा करने के बाद कारोबारियों को दुकानों का आबंटन हो गया है। ग्राउंड फ्लोर के 15-20 कारोबारियों ने ही दुकानें शुरू की हैं, लेकिन इससे बाजार में रौनक नहीं है। नगर निगम के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लगभग डेढ़ दशक में पूरी हुए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की वैल्यू सामने नहीं आ पा रही है।

भास्कर टीम ने मौके पर पाया कि सफाई नहीं होने से स्मार्ट बाजार का परिसर गंदगी से भरने लगा है। बेसमेंट का उपयोग कचरा डंप करने के लिए किया जा रहा है। बिल्डिंग के बाहर ग्राउंड फ्लोर पर छज्जे के नीचे भिखारियों का न सिर्फ कब्जा है, बल्कि वहां चूल्हे-बर्तन तक जम गए हैं। इस बाजार के परिसर का इस्तेमाल कारोबारी पार्किंग के लिए करने लगे हैं।

ज्यादातर मुद्दे छोटे लेकिन सालभर से अनसुलझे

बाजार में दुकानें अब तक नहीं खुलने की वजह व्यापारियों और निगम के बीच लीज डीड को लेकर मतभेद है। निगम ने लीजडीड की जो शर्तें तय हैं, व्यापारी उसमें बदलाव चाहते हैं। जैसे लीज डीड के अनुसार बाजार का मेंटनेंस व्यापारियों की समिति को करना है।

कारोबारी अड़े हैं कि यह शर्त हटाई जाए। उनका कहना है कि मेंटनेंस में साफ-सफाई और गार्ड इत्यादि का सालाना खर्च ही दो लाख से ज्यादा खर्च आएगा। दुकानों के अलावा पूरे बाजार का बिजली बिल समिति को चुकाने कहा जा रहा है। पूरे परिसर में एक भी नल नहीं दिया गया है।

बाजार के लिए नल भी समिति को ही लगवाना पड़ेगा। व्यापारियों ने निगम को रियायतों का जो आवेदन दिया है, उसके अनुसार वे मेंटनेंस के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें फ्री होल्ड किया जाए। यानी उनसे किसी तरह का किराया और भूभाटक इत्यादि न लिया जाए। व्यापारियों की मांग है कि चारों तरफ से खुले बाजार की सुरक्षा के लिए ओपन स्पेस में निगम उन्हें चैनल गेट लगाकर दे।

निगम ने व्यापारियों को पार्किंग का संचालन का भी आफर दिया है। इससे बाजार का मेंटनेंस खर्च निकल आएगा। इस आफर पर व्यापारियों और निगम अफसरों के बीच चर्चा चल रही है। नियमत: संचालन अधिकार मिलने पर समिति को सालाना एकमुश्त राशि निगम को देनी पड़ेगी।

जवाहर बाजार व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुभाष बजाज ने कहा कि समिति की ओर से व्यापारियों ने कुछ मांगे निगम के सामने रखी हैं। बाजार की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है, इसलिए चैनल गेट लगाने की मांग कर रहे हैं। और भी मुद्दे हैं, जिनपर गतिरोध दूर नहीं हुआ है।

दो दशक पुराना प्रोजेक्ट, शुरू से विवादित
जवाहर बाजार का प्रोजेक्ट करीब दो दशक पुराना है। काफी अर्से से पुराने बाजार को तोड़कर नए बाजार की चर्चा चल रही थी, लेकिन मुश्किल काम और व्यापारियों के बीच सहमति नहीं होने के कारण हर बार रुकता रहा। पूर्व निगम कमिश्नर रजत बंसल ने व्यापारियों के बीच सहमति बनाकर प्रोजेक्ट को स्मार्ट सिटी से शुरू कराया।

दुकानें हटाकर निर्माण शुरू किया जाना था, लेकिन व्यापारियों ने कुछ दुकानें हटाने की अनुमति दी और सामने की दुकानों को तब तक नहीं तोड़ने के लिए कहा जब तक इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। तब निगम अफसरों ने पीछे से काम शुरू किया और सबसे अंत में सामने की दुकानें हटाई।

दुकानें टूटने के बाद व्यापारियों ने कारोबार बंद होने का हवाला देकर वैकल्पिक व्यवस्थापन की मांग की। तब उन्हें सुभाष स्टेडियम की खाली दुकानों में कारोबार करने की अनुमति दी गई। दुकान आवंटित होने से पहले तक कारोबारी पिछले करीब एक साल से सुभाष स्टेडियम में ही कारोबार कर रहे थे।

शर्तें शासन ने तय कीं, नहीं हटेंगी : निगम
अपर आयुक्त पुलक भट्‌टाचार्य ने साफ कर दिया कि लीज डीड शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही तय हुई है, इसलिए कोई फेरबदल नहीं कर सकते। मार्केट का मेंटनेंस समिति को ही करना पड़ता है। व्यापारी नल कनेक्शन की मांग कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े बाजार के लिए निगम निशुल्क पानी नहीं दे सकता। हमने रास्ता यह निकाला कि दो बेसमेंट वाली पार्किंग व्यापारियों की समिति को सौंपने का फैसला कर लिया, ताकि होने वाली आय से व्यापारी मेंटेनेंस कर सकें। पर वह तैयार नहीं हैं। जो मांगे जायज हैं, उनपर बातचीत का रास्ता खुला है।

राहत पर विचार करेंगे : ढेबर

  • शासन की गाइडलाइन में बदलाव करना संभव नहीं है। यह काफी लंबी प्रक्रिया है। हां, व्यापारियों को कुछ राहतें चाहिए तो उसपर विचार किया जा सकता है, लेकिन विरोध और नामंजूरी जैसी कोई बात नहीं स्वीकार की जाएगी। – एजाज ढेबर, महापौर रायपुर

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