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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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गाजियाबाद की साक्षी चौधरी अब भारत की स्टार तीरंदाज दीपिका कुमारी की राह पर चलने को तैयार हैं। साक्षी का चयन पोलैंड में शुरू हो रहे वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप के लिए हुआ है। यह वर्ल्ड चैंपियनशिप 9 से 15 अगस्त के बीच होना है।

कंपाउंड राउंड में साक्षी के अलावा मंगोलपुरी की आर्चरी सेंटर से प्रगति चौधरी का भी सिलेक्शन हुआ है। साक्षी पहली बार देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। दो साल पहले साक्षी की मां ने ज्वेलरी बेचकर उनके लिए कंपाउंड राउंड के इक्विपमेंट खरीदे थे।

वहीं, ट्रायल से पहले धनुष के रिलीजर (धनुष का एक पार्ट है, जो तीर के खींचने में सहायक होता है) के टूट जाने पर उनकी मां ने अपनी रिंग को बेच दिया था। यही नहीं, साक्षी के पास कॉम्पिटिशन के लिए अपने तीर तक नहीं थे, उन्होंने ट्रायल में अपनी सहेली से उधार के तीर लेकर हिस्सा लिया था। साक्षी ने ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की।

कोरोना काल के दौरान पापा की चली गई नौकरी
साक्षी ने भास्कर को बताया कि उनके पापा जितेंद्र सिंह प्राइवेट कंपनी में जॉब करते थे, लेकिन कोरोना काल में उनकी नौकरी चली गई थी। घर में उनसे बड़े भाई हैं। घर की माली हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है। उन्होंने दो साल पहले जब आर्चरी सीखने की इच्छा जताई तो मां ने अपनी ज्वेलरी बेचकर करीब 1 लाख रुपए का धनुष कंपाउंड राउंड के लिए दिलाया था। कॉम्पिटिशन से पहले मेरी धनुष की रिलीजर टूट गई थी। इसकी कीमत करीब 25 हजार की है।

साक्षी ने बताया कि घर में इसे खरीदने तक के पैसे नहीं थे, मां नहीं चाहती थी कि मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप में जाने का मौका गंवा दूं। इसलिए मां ने अपनी रिंग बेचकर रिलीजर दिलाया। हालांकि, तीर के लिए पैसे का इंतजाम नहीं हो सका, तो मेरे कोच विकास सर ने किसी से तीर दिलवाए। मैं ट्रायल में शानदार प्रदर्शन कर खुश हूं। मेरा लक्ष्य दीपिका दीदी की तरह देश के लिए आर्चरी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना है।

गाजियाबाद से रोजाना दो घंटे का सफर तय कर मंगोलपुर में ट्रेनिंग करने के लिए आती हैं
कोच विकास का कहना है कि साक्षी रोजाना गाजियाबाद से मंगोलपुरी स्थित सैनी भवन में करीब 2 घंटे का सफर तय करके आती हैं। उन्होंने बताया कि साक्षी टैलेंटेड हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह जरूर मेडल जीतेंगी। वहीं, इस टूर्नामेंट के लिए प्रगति का भी चयन हुआ है। प्रगति की कहानी भी प्रेरणादायक रही है।

प्रगति को बेन हैमरेज हो गया था। उसके बाद प्रगति ने वापसी की थी और जून के अंतिम हफ्ते में वर्ल्ड कप थ्री के ट्रायल में टॉप पर रहीं थीं। इसके बाद उन्होंने पेरिस में देश का प्रतिनिधित्व किया। इस वर्ल्ड कप में दीपिका ने 2 गोल्ड समेत 3 मेडल जीते था।

ट्रायल में रहीं तीसरे स्थान पर
अकेडमी के हेड कोच सुरेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि सोनीपत में 8-9 जुलाई को ट्रायल हुआ था। सेंटर से साक्षी और प्रगति का चयन हुआ। ट्रायल में हरियाणा की दिव्या तायल पहले स्थान पर रही। जबकि प्रगति दूसरे और साक्षी तीसरे स्थान पर रही।

शुक्रवार से शुरू हो रहा है टोक्यो ओलिंपिक
​​​​​​​23 जुलाई से शुरू होने वाले टोक्यो ओलिंपिक में कुछ ही घंटे का समय बचा है। आर्चरी में इस बार रिकर्व राउंड में दीपिका के अलावा पुरुष टीम भाग ले रही है। जिसमें अतनुदास, प्रवीण जाधव और तरुण दीप राय शामिल हैं। आर्चरी में दीपिका कुमारी पदक की प्रबल दावेदार हैं। उन्हें यहां तक के सफर में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

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