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Thursday, October 21, 2021
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रिलेशनशिप: क्या इमोशनल पत्नी वाकई पति को ज्यादा बिगाड़ती है?

3 दिन पहलेलेखक: श्वेता कुमारी

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वर्किंग वुमन अच्छी बहू, पत्नी, भाभी और बेटी बनने के चक्कर में हर वो जिम्मेदारी संभालती है, जो एक हाउस वाइफ करती है। उसे लगता है कि घर के काम मेरी पहली जिम्मेदारी है। इससे ऊपर मैं जो कुछ भी करती हूं वो मेरी चॉइस है, एक पल को उसे छोड़ा जा सकता है, लेकिन औरत होने की असलियत नहीं छूट सकती।

पत्नी इमोशनल जबकि प्रैक्टिकल होते हैं पति

महिलाएं पुरुष से ज्यादा इमोशनल होती हैं। रिश्ते, घर, दफ्तर हर जगह वो अपनी जिम्मेदारी समझती हैं और जरूरत के हिसाब से बर्ताव करती हैं। उनकी लव मैरिज हो या अरेंज, अंडरस्टैंडिंग पति मिल जाए, तो महिलाओं को लगता है कि लाइफ सेट है। पति ऑफिस के अलावा कभी-कभी घर के कामों में भी कभी हाथ बंटा दें, तो महिलाएं इस बात को अपने वर्क प्लेस और दोस्तों के बीच बहुत खुश होकर शेयर करती हैं।

हालांकि पुरुषों के साथ ऐसा नहीं है। वे बेहद प्रैक्टिकल और सेलेक्टिव होते हैं। पितृसत्तात्मक के खांचे से बाहर निकलकर भी वे उसी सोच के इर्द-गिर्द होते हैं। अपने प्रोफेशन, सर्कल या खुद को जेंडर इक्वालिटी का समर्थक मानते हुए कई बार वो रसोई में बीवी की मदद करने को पहुंच जाते हैं, लेकिन उनसे कहा जाए कि तुम्हें पूरा घर और अपने ऑफिस का काम हर दिन संभालना है, तो वो बिदकने में देर नहीं लगाएंगे। वो ये गिनना शुरू कर देंगे कि ये तुम्हारा काम है, मैं बस तुम्हारी मदद के लिए आ गया था, लेकिन हर रोज नहीं कर पाऊंगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

इस बारे में साइकेट्रिस्ट डॉ. धर्मेंद्र सिंह कहते हैं कि महिलाओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी यही देखा है। उनकी माएं या परिवार की अन्य महिलाएं अगर कामकाजी रही हैं, बवजूद इसके उन्होंने घर की जिम्मेदारी ठीक वैसे ही निभाई है, जैसे एक हाउस वाइफ निभाती हैं। कई बार महिलाएं तानों के डर से भी सबकुछ करती हैं। उन्हें लगता है कि पति घर के काम करें और वो बैठी रहेगी, तो लोग उसे बुरी पत्नी मानेंगे। सास-ससुर, ननद जेठानी की नजरों में वो एक ऐसी औरत बन जाएगी, जिसे पैसे कमाने का घमंड है, इसलिए वो घर के काम खुद नहीं करती।एक काउंसलिंग इंस्टीट्यूट की फाउंडर के मुताबिक पत्नियां इमोशंस की लहर में बहकर घर के काम निपटाने में बहुत खुशी महसूस करती हैं, लेकिन हसबैंड इमोशनल होकर नहीं सोचते, उनकी एनर्जी प्रेक्टिकल वर्क में ज्यादा होती है। पत्नियां घर और ऑफिस इसलिए बखूबी निभा पाती हैं, क्योंकि वो दोनों जगहों से इमोशनली जुड़ी होती हैं। ऐसा नहीं है कि पति ऑफिस और घर से नहीं जुड़ा होता है, लेकिन उसका प्रैक्टिकल माइंड, इमोशनल हार्ट पर हावी रहता है।

दोनों के बीच कैसे बनें बैलेंस?

अगर रिश्ते में बैलेंस और बॉन्डिंग चाहिए तो जिम्मेदारी शेयर करने का कल्चर डेवलप करना होगा। न्यू कपल्स को फ्यूचर प्लानिंग करने से पहले अपने रिश्ते में बैलेंस बनाना होगा। उन्हें समझना होगा कि काम जेंडर देखकर नहीं बांटा जाता। अगर दोनों ऑफिस जाने वाले हैं या एक घर पर भी रहता/रहती है, तब भी प्यार बनाएं रखने के लिए एक-दूसरे को समझने और संभालने से ही वो अच्छी जोड़ी बनकर जिंदगी को खुशनुमा बना सकेंगे।

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