वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 12 Jun 2021 01:07 AM IST

सार

अमेरिका में लगभग 40 लाख भारतीयों की बड़ी संख्या है, अमेरिका की बड़ी कंपनियों में भारतीय बड़े पदों पर हैं। फिर भी भारतीयों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है

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विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए अमेरिका सबसे पसंदीदा माना जाता है। अमेरिका में लगभग 40 लाख की बड़ी संख्या अमेरिका में रहती है जो आर्थिक रूप से और पेशेवर रूप से काफी सफल हैं। तब भी अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को भेदभाव का सामना करना पड़ता है। 

एक सर्वे के मुताबिक, हर दो में से एक भारतीय-अमेरिकी भेदभाव से पीड़ित है। नौ जून को भारतीय अमेरिकी एटीट्यूड सर्वे 2020 जारी हुआ, इसके मुताबिक ट्रंप के कार्यकाल के दौरान पिछले साल हर दो में से एक भारतीय अमेरिकी को भेदभाव झेलना पड़ा और रंग के आधार पर सबसे ज्यादा पक्षपात देखा गया।

त्वचा के रंग को देखकर भेदभाव
सर्वे जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया और कार्नेगी एंडोमेंट ने एक पोलिंग ग्रुप के साथ किया है। इसके मुताबिक, 30 फीसदी लोगों को लगता है कि त्वचा के रंग की वजह से भेदभाव किया जाता है। 18 फीसदी लोगों का कहना है कि लिंग या धर्म के आधार पर भेदभाव होता है।

कुल मिलाकर 31 फीसदी लोगों को लगता है कि भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ भेदभाव एक बड़ी समस्या है। 53 फीसदी इसे छोटी समस्या मानते हैं और 17 फीसदी इसे समस्या मानते ही नहीं। 

73 फीसदी लोग मानते हैं कि एशियाई-अमेरिकी लोग जो भारतीय मूल के नहीं हैं, उन्हें भारतीय-अमेरिकी लोगों से ज्यादा भेदभाव झेलना पड़ता है। 90 फीसदी लैटिनो अमेरिकन, 89 फीसदी एलजीबीटीक्यू और 86 फीसदी अफ्रीकन-अमेरिकी लोगों को भेदभाव का ज्यादा बड़ा शिकार मानते हैं।

वहीं अमेरिका में हाल ही में जॉर्ज फ्लायड की मृत्यु के बाद बड़े स्तर पर भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं। सड़कों पर बड़ी बड़ी रैलियां आयोजित की जा रही है। रैलियों के दौरान कई बार प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच काफी टकराव भी देखने को मिलता है। कई बार पुलिस लाठीचार्ज भी करती है। लेकिन फिर भी अमेरिका में भेदभाव एक बड़ी समस्या है। 

विस्तार

विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए अमेरिका सबसे पसंदीदा माना जाता है। अमेरिका में लगभग 40 लाख की बड़ी संख्या अमेरिका में रहती है जो आर्थिक रूप से और पेशेवर रूप से काफी सफल हैं। तब भी अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को भेदभाव का सामना करना पड़ता है। 

एक सर्वे के मुताबिक, हर दो में से एक भारतीय-अमेरिकी भेदभाव से पीड़ित है। नौ जून को भारतीय अमेरिकी एटीट्यूड सर्वे 2020 जारी हुआ, इसके मुताबिक ट्रंप के कार्यकाल के दौरान पिछले साल हर दो में से एक भारतीय अमेरिकी को भेदभाव झेलना पड़ा और रंग के आधार पर सबसे ज्यादा पक्षपात देखा गया।

त्वचा के रंग को देखकर भेदभाव

सर्वे जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया और कार्नेगी एंडोमेंट ने एक पोलिंग ग्रुप के साथ किया है। इसके मुताबिक, 30 फीसदी लोगों को लगता है कि त्वचा के रंग की वजह से भेदभाव किया जाता है। 18 फीसदी लोगों का कहना है कि लिंग या धर्म के आधार पर भेदभाव होता है।

कुल मिलाकर 31 फीसदी लोगों को लगता है कि भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ भेदभाव एक बड़ी समस्या है। 53 फीसदी इसे छोटी समस्या मानते हैं और 17 फीसदी इसे समस्या मानते ही नहीं। 

73 फीसदी लोग मानते हैं कि एशियाई-अमेरिकी लोग जो भारतीय मूल के नहीं हैं, उन्हें भारतीय-अमेरिकी लोगों से ज्यादा भेदभाव झेलना पड़ता है। 90 फीसदी लैटिनो अमेरिकन, 89 फीसदी एलजीबीटीक्यू और 86 फीसदी अफ्रीकन-अमेरिकी लोगों को भेदभाव का ज्यादा बड़ा शिकार मानते हैं।

वहीं अमेरिका में हाल ही में जॉर्ज फ्लायड की मृत्यु के बाद बड़े स्तर पर भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं। सड़कों पर बड़ी बड़ी रैलियां आयोजित की जा रही है। रैलियों के दौरान कई बार प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच काफी टकराव भी देखने को मिलता है। कई बार पुलिस लाठीचार्ज भी करती है। लेकिन फिर भी अमेरिका में भेदभाव एक बड़ी समस्या है। 

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