• Hindi News
  • Business
  • Revenue Declined By 5% In The Financial Year 2020 21, But Net Profit Increased By 105%

मुंबईएक दिन पहले

  • कॉपी लिंक
  • एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में दी गई है जानकारी
  • 15 सेक्टर्स ने 2.09 लाख करोड़ रुपए कर्ज घटाया है

वित्त वर्ष 2020-21 और यहां तक कि वित्त वर्ष 2021-2022 में कॉर्पोरेट स्पेस में एक उतार चढ़ाव (rollar coaster) वाला समय रहा है। वित्त वर्ष 2021 में 4000 लिस्टेड कंपनियों के रेवेन्यू में 5% की गिरावट दिखी है। वित्त वर्ष 2020 में इनका शुद्ध फायदा 105% बढ़ा है। यह जानकारी एसबीआई की रिपोर्ट में दी गई है।

15 सेक्टर्स ने घटाए अपने कर्ज

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्त वर्ष 2021 के दौरान 15 सेक्टर्स ने अब अपने कर्ज में 2.09 लाख करोड़ रुपए की कमी की है। रिफाइनरी, स्टील, फर्टिलाइजर, कपड़ा, माइनिंग आदि सेक्टर्स के कर्ज में 6% से 64% तक की कमी आई है। वित्त वर्ष 2020 में इफेक्टिव टैक्स रेट (ईटीआर) में कमी के साथ-साथ महामारी के चलते कम ब्याज दर इंडिया इंक के लिए एक वरदान साबित हुआ है।

ईटीआर घट कर 26% पर आया

उन लिस्टेड कंपनियों के लिए ईटीआर वित्त वर्ष 2020 में 35% से घटकर वित्त वर्ष 2021 में 26% हो गया। हालांकि सही कर पेमेंट में 50,000 करोड़ रुपए से अधिक की वृद्धि हुई। इंजीनियरिंग, रियल्टी, ऑटोमोबाइल, ट्रेडिंग आदि सहित कई सेक्टर्स ने वित्त वर्ष 2020 की तुलना में वित्त वर्ष 2021 में 1% से 24% ईटीआर में कमी की जानकारी दी थी।

टैक्स कलेक्शन काफी ज्यादा रहा

वित्त वर्ष 2022 में कॉरपोरेट टैक्स रेवेन्यू के चलते टैक्स कलेक्शन काफी ज्यादा रहा है। रिपोर्ट कहती है कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2020 में टैक्स में कटौती ने सीमेंट, टायर और कंज्यूमर जैसे सेक्टर्स ने महामारी में रेवेन्यू में 19% का योगदान दिया है। कहीं-कहीं तो यह 50% से ज्यादा योगदान दिखाई दे रहा है।

कम ब्याज दर का भी मिला फायदा

कम ब्याज दर ने भी बड़े पैमाने पर डीलिवरेजिंग (deleveraging) में कंपनियों की मदद की है। ओवरआल रेवेन्यू के लिए औसतन 5% का योगदान दिया है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हेल्थकेयर और सीमेंट जैसे सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। खर्च में कमी के मामले में रेवेन्यू में ओवरऑल योगदान अधिक से अधिक 31% तक रहा है। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा कंपनियों ने महामारी से लड़ने के लिए कई रास्ते तलाशे हैं।

अपैरल और रिफाइनरीज की लागत घटी

अपैरल और रिफाइनरीज जैसे सेक्टर्स ने अपनी लागत में औसतन 107% की कटौती की है। हालांकि, ग्लोबल कमोडिटी प्राइस में वृद्धि के साथ इनपुट लागत में वृद्धि दर्ज करते हुए मेटल्स, कृषि केमिकल जैसे सेक्टर्स में खर्च बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2021 में कर्मचारी लागत में औसतन 3% की कटौती की गई है। कर्मचारियों की लागत में अधिकतम कटौती कंज्यूमर सेक्टर में हुई है।

रिजर्व बैंक उदार नीति को बढ़ा रहा है

जिस तरह से भारतीय रिजर्व बैंक उदार नीति को बढ़ा रहा है, हमारा मानना है कि यह बेहतर कॉर्पोरेट परिणामों के लिए शुभ संकेत है। इसलिए टैक्स कलेक्शन अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है। जैसे-जैसे हम बड़े पैमाने पर वैक्सीन के टीकाकरण के लिए आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे नए इन्वेस्टमेंट की आहट दिखाई देने लगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन तरह के उपायों से कंपनियों को फायदा हो रहा है। इन उपायों में खर्च में कमी, ब्याज की कम दरें और कम टैक्स हैं। यह तीनों मिलाकर कंपनियों को फायदा हो रहा है।

खबरें और भी हैं…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here