3 घंटे पहले

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यूक्रेन जंंग शुरू होने के बाद रूस से तेल की खरीदारी अमेरिका-भारत के बीच विवाद की वजह रही है। - Dainik Bhaskar

यूक्रेन जंंग शुरू होने के बाद रूस से तेल की खरीदारी अमेरिका-भारत के बीच विवाद की वजह रही है।

अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने भारत के रूस से तेल खरीदने पर बयान दिया है। उन्होंने कहा, ‘भारत ने रूस का तेल खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई उनका तेल खरीदे। ये हमारी पॉलिसी का डिजाइन था। हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढे़ं।’ दरअसल, यूक्रेन पर हमले के बाद से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस से तेल और गैस खरीदने पर पाबंदियां लगा दी थी।

इससे यूरोप के कई देशों को गैस की किल्लत का सामना करना पड़ा था। हालांकि, भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा था। ऐसे में कई पश्चिमी देशों ने भारत पर सवाल खड़े किए थे। वहीं, भारत अपने बचाव में कहता रहा है कि वो किससे तेल खरीदेगा और किससे नहीं ये उनका फैसला है। वो किसी के दबाव में नहीं आएगा। इस बीच गार्सेटी ने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद कर किसी नियम का उल्लंघन ही नहीं किया।

वहींं, कल ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हम पर रूस से तेल न खीदने के लिए दबाव बनाया गया था। जयशंकर ने कहा था,’सोचिए अगर हमने दबाव के आगे झुक गए होते और रूस का तेल खरीदना बंद कर दिया होता तो लोगों के लिए पेट्रोल की कीमत कितनी बढ़ जाती, पेट्रोल कम से कम 20 रुपए महंगा होता।

अमृतसर में BJP कैंडिडेट के लिए वोट मांगते वक्त रूसी तेल खरीदने को लेकर दबाव की बात कहते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर

अमृतसर में BJP कैंडिडेट के लिए वोट मांगते वक्त रूसी तेल खरीदने को लेकर दबाव की बात कहते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर

भारत-अमेरिका के रिश्ते मॉडर्न रोमांटिक रिलेशनशिप जैसे
गार्सेटी ने भारत-अमेरिका के रिश्तों को मॉडर्न रोमांटिक रिलेशनशिप जैसे बताया। उन्होंने कहा, ‘अगर फेसबुक की भाषा में भारत-अमेरिका के रिश्तों को देखा जाए तो ये कहा जा सकता है कि पहले हम कॉम्प्लिकेटेड रिश्ते में थे और अब हम डेट कर रहे हैं। हम एक दूसरे की आदतों को समझ रहे हैं ये कह सकते हैं अब हम लिवइन में हैं।

गार्सेटी ने कहा, ‘भारत ये स्पष्ट कर चुका है कि उसकी पॉलिसी नॉन-एलाइनमेंट की है। यानी वो किसी गुट का हिस्सा नहीं बनना चाहता है। उन्हें किसी के साथ की जरूरत नहीं है। रोमांटिक भाषा में कह सकते हैं कि भारत अकेला रहना पसंद करेगा शादी नहीं करेगा। भारत और अमेरिका दुनिया के 2 बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों में खामियां हैं। हमें स्वीकार करना चाहिए।’

रूस भारत के रिश्तों पर गार्सेटी के अहम बयान

  • ये बात हमें निराश करती है कि रूस ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर यूक्रेन के खिलाफ एक अनैतिक जंग छेड़ी। भारत फिर भी रूस के खिलाफ ज्यादा मुखरता से नहीं बोलता है। गार्सेटी ने कहा, ‘हमें ये बात याद रखने की जरूरत है कि रूस तब भारत के साथ था जब हम नहीं थे।’
  • भारतीयों के बीच रूस की छवि अच्छी है। मैं कई लोगों से मिला हूं जिनकी पहला विदेशी भोजन रूस से था, जिनकी पहली पढ़ी गई विदेशी किताब रूस की थी। इसके अलावा हम ये उम्मीद नहीं कर सकते कि भारत अपने ऊपर दो देशों (चीन के साथ रूस) को भी दुश्मन बना ले।
  • अमेरिका ने भारत को हथियार नहीं दिए उसके पास जो भी हथियार हैं वो रूसी हैं। भारत को 2 तरफ (चीन, पाकिस्तान) से हमले का डर है। ऐसे में हम ये नहीं सोच सकते भारत रूस विरोधी हो जाए।
  • हमने भारत की आजादी की मांग की। हालांकि, 1970 में हम चीन के करीब चले गए और हमने भारत को रूस के करीब जाने के लिए मजबूर किया। हमने पाकिस्तान से भी करीबी बढ़ाई। भारत की सरकार को लगा की अमेरिका भरोसे के लायक देश नहीं है।
  • भारत के साथ संबंध 2000 के दशक में सुधरे। जब भारत परमाणु देश बन चुका था। बुश और क्लिंटन ने महसूस किया कि भारत को परमाणु ताकत होने के चलते अब साडइलाइन नहीं किया जा सकता है।
  • तब से चाहे डेमोक्रेट्स की सरकार रही हो या रिपब्लिकन्स की अमेरिका के भारत के साथ रिश्ते सुधरते चले गए।

रूस से सस्ता तेल खरीदकर भारत ने बचाए ₹22,490 करोड़
2023 के पहले 9 महीनों में भारतीय कंपनियों ने रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदकर करीब ₹22,490 करोड़ बचाए थे। भारत ने इस दौरान 6.91 करोड़ टन तेल रूस से इंपोर्ट किया था। जनवरी से सितंबर के बीच भारत ने रूस से ₹43,782 प्रति टन की रेट से तेल खरीदा (इसमें शिपिंग और दूसरे चार्ज शामिल हैं।)।

इस दौरान इराक और दूसरे देशों में क्रूड ऑयल प्रति टन ₹47,019 की रेट में बिक रहा था। इस हिसाब के कंपनियों ने करीब ₹3200/टन सस्ते में तेल खरीदी है। सरकारी आंकड़ों के हवाले से रॉयटर्स ने इस बात की जानकारी दी थी।

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