3 घंटे पहले

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पूरे घर में अफरातफरी का माहौल था। मम्मी-पापा, भाई-बहन सबको लग रहा था कि कहीं पीहू सच में तो घर से नहीं भाग गई। उसका फोन, बैग, कपड़े सब उसके कमरे में थे। नहीं थी तो बस पीहू। उसे सुबह से ही किसी ने नहीं देखा था।

अग्रिम ने कार में बैठी पीहू को भरोसा दिया कि घरवाले कुछ दिन बाद नॉर्मल हो जाएंगे। मैं बात करके सबको समझा दूंगा। तुम बालिग हो, एक बार शादी हो जाए तो घरवालों को आशीर्वाद देने के सिवा और कोई तकलीफ नहीं होने देंगे।

इतने तनाव भरे माहौल में भी अग्रिम की ऐसी बात सुनकर पीहू की हंसी छूट गई। लेकिन शायद उसकी किस्मत में हंसी नहीं लिखी थी। पीहू और अग्रिम तयशुदा जगह पर पहुंचे तो उनके सारे दोस्त परेशान नजर आ रहे थे। कार से उतरकर अग्रिम ने माजरा जानना चाहा तो उसके और पीहू के ‘पैरों तले जमीन और सिर ऊपर आसमान’ दोनों खिसक चुके थे।

सारी तैयारियों के बाद बीजू का कहीं अता-पता नहीं था। बीजू मैथ्यू, पीहू का होने वाला दूल्हा। अलग धर्म होने की वजह से दोनों के घरवाले इस शादी के लिए तैयार नहीं हुए। पीहू ने घर से भागने की धमकी दी, तब भी नहीं। इसलिए पीहू और बीजू ने शादी के लिए अग्रिम और उसके ग्रुप की मदद ली थी।

अग्रिम और उसका ग्रुप पूरे कॉलेज और उसके बाहर भी कपल्स को घर से भगाकर शादी करवाने के लिए फेमस थे। असली बात तो किसी को नहीं पता पर लोग कहते थे कि अग्रिम की दीदी को उसके मम्मी-पापा ने शादी की मंजूरी नहीं दी थी तो उसने सुसाइड कर लिया था। तब अग्रिम आठ-दस साल का रहा होगा।

अग्रिम कॉलेज पासआउट करने से पहले से ही अपने और आसपास के शहरों में फेमस हो चुका था। उसकी सैलरी का बड़ा हिस्सा इस काम में जाता और कई बार तो धमकी, मारपीट, कोर्ट-कचहरी की मुसीबतें अलग झेलनी पड़तीं, लेकिन उसको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था।

लेकिन आज फर्क पड़ना था। चार साल में पहली बार ऐसा हुआ था कि शादी वाले दिन ही दूल्हे का अता-पता नहीं था। शुरू में तो बीजू के फोन पर रिंग जा रही थी लेकिन दो-तीन घंटे से उसका फोन ‘आउट ऑफ रीच’ हो चला था।

अग्रिम ने सबके लिए चाय ऑर्डर की और पीहू के घर के बाहर मौजूद अभिमन्यु को फोन किया तो उसने बताया कि फिलहाल पीहू का घर लौटना ठीक नहीं होगा। उसके घरवाले बहुत गुस्से में हैं और उसने पीहू के पापा को कहते सुना था कि अब वो उसे घर में नहीं घुसने देंगे।

अग्रिम ने फैसला किया कि बीजू का पता चलने तक वह पीहू को अपने घर पर रखेगा। कुछ दिनों में पीहू के घरवालों का गुस्सा भी शांत हो जाएगा। पीहू के लिए किसी अजनबी के घर जाकर रहना बड़ी अजीब सी फीलिंग थी। लेकिन अग्रिम के डैड से मिलकर उसकी वो परेशानी जाती रही। वो पीहू को कंफर्टेबल फील कराने के लिए पुराने किस्से सुनाने लगे जब लड़की या लड़के के रिश्तेदार अग्रिम के घर तक लड़ने पहुंच जाते थे। हां, अग्रिम की मॉम ने कम बात की लेकिन उन्होंने उसके खाने-पीने, कपड़ों और रहने का पूरा इंतजाम करवाया।

इस बीच अग्रिम दो-तीन दिन तक सिर्फ सोने के लिए घर आया था।

संडे म़ॉर्निंग वह अचानक आकर पीहू को अपना फोन देते हुए बोला कि लो अपने घर पर बात करो। माइक पर हाथ रखकर बोला कि सबसे यही कहना है कि तुम घरवालों से नाराज होकर दोस्तों के साथ लॉन्ग ट्रिप पर चली गई थी और आज ही लौटी हो। अग्रिम ने पीहू को कुछ शॉपिंग कराई और शाम तक वह अपने घर पर थी। रास्ते में अग्रिम ने पीहू से केरल में बीजू के घर का एड्रेस लिया और कहा कि वह जल्द ही पीहू को कॉन्टैक्ट करेगा। एक घंटा पीहू के घर पर बिताकर अग्रिम वापिस लौट गया था।

उधर घर लौटी पीहू के मन में जैसे पिछले तीन-चार दिनों से शक, बेवफाई, प्यार, शादी, जिंदगी के रंगों के तमाम बादल उमड़ रहे थे और आज पानी उसकी आंखों के रास्ते बरस पड़ा। घरवालों को लगा कि बेटी शायद उनको हुई तकलीफ देखकर पछता रही है। लेकिन इस बरसात की असलियत किसी को भी मालूम नहीं थी, पीहू तक को नहीं।

वह उलझन में थी कि जिस बीजू के साथ वह पिछले पांच साल से रिश्ते में थी, वह ऐन शादी के दिन पीठ दिखाकर कैसे भाग सकता है। जबकि ऐसे शादी करने का आइडिया भी उसी का था। रह-रहकर उसे ये ख्याल आता कि अगर अग्रिम के घरवाले उसे अपने पास नहीं रोकते तो वो इतने दिन कहां रहती, क्या करती, क्या बोलकर घर वापस कैसे आती।

असल में पीहू उस सच को इग्नोर कर रही थी, जो शायद उसके साथ घट चुका था। वह बार-बार अग्रिम के इर्द-गिर्द ख्याल बुनने लगती। कभी उसके घरवालों के, कभी उसके घर के, कभी उसके दोस्तों के… वह अग्रिम के बारे में आ रहे ख्यालों को दिमाग से झटककर दूर कर देना चाहती थी। उसे पता था कि वह कमिटेड है और ताजिंदगी रहेगी। लेकिन उसके दिमाग से पिछले तीन-चार दिन नहीं निकल रहे थे।

खुले दिमाग और खुद से ज्यादा ख्याल रखने वाले घरवाले, अनजान लोगों की फिक्र करने वाला अग्रिम अगर किसी अपने की फिक्र करे तो उसे कितना खुश रखेगा, यही सवाल बार-बार पीहू के मन में आता और वह हर बार इस ख्याल से किनारा कर लेती। वह इस डायरेक्शन में कुछ भी सोचना गवारा नहीं कर सकती थी। वह अपने पांच सालों की तपस्या, बीजू के साथ बने रिश्ते को बचाने की मेहनत, प्यार सबकुछ मिट्टी में कैसे मिल जाने देती।

अग्रिम के घर से आने के बाद से उसकी रोज देर रात तक अग्रिम से बात होती थी। बीजू की खोज-खबर से शुरू हुई बात में बाद में उसका नामो-निशान तक नहीं रह गया था। पीहू और अग्रिम एक-दूसरे के बारे में ज्यादा से ज्यादा जान रहे थे। अपनी पसंद बताने से लेकर दूसरे की नापसंद जानने तक न जाने उन्होंने काफी कम समय में एक-दूसरे को पूरा जान लिया था। अब पीहू के घर में भी अग्रिम की एंट्री उसके लेटेस्ट और समझदार दोस्त के तौर पर हो चुकी थी।

इस बीच पीहू और अग्रिम का घर, कॉलेज और बाहर भी मिलना-जुलना भी बढ़ गया था। एक शाम पीहू के फेवरेट डोसा कॉर्नर से घर लौटते हुए न जाने दोनों के बीच क्या पका कि दोनों का हाथ कब एक-दूसरे के हाथ में आया किसी को पता नहीं चला। जब उन्हें इसका अहसास हुआ तो भी दोनों में से किसी ने उसे अलग नहीं किया। पीहू का घर आने पर अग्रिम ने जब बैठे-बैठे उसके लिए कार का डोर खोलने की कोशिश की तो दोनों इतने करीब आ चुके थे उन्हें एक-दूसरे की धड़कन सुनाई देने लगी।

उस पल में पीहू ने जैसे ही अपनी आंखें बंद कीं तो अग्रिम ने उसके खूबसूरत मुंह को अपने हाथों में लेते हुए किस कर लिया। समय जैसे वहीं पर रुक गया था। कुछ पलों बाद पीहू हड़बड़ी में कार से उतरकर घर के अंदर चली गई। उस रात उसने बीसियों बार अपने आप से पूछा था कि क्यों वह अग्रिम को मना नहीं कर पाई? उसे अपने अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो वह अगले एक हफ्ते तक अग्रिम से पूछती रही थी कि क्या हमारे फर्स्ट किस में मैंने भी तुमको रिस्पॉन्ड किया था?

असल में वह खुद को दिलासा दे रही थी कि वह बीजू को धोखा नहीं दे रही है। पीहू आज भी अग्रिम की उधेड़बुन में बैठी थी शेरवानी पहने अग्रिम ने उसके रूम के डोर को नॉक किया और बोला कि जल्दी तैयार हो जाओ। थोड़ा ठहरकर बोला कि उसी दिन वाली साड़ी पहन लेना। इतना बोलकर वह नीचे पीहू के घरवालों से बात करने चला गया।

तैयार होते समय पीहू का दिल नगाड़ों की तरह बज रहा था। हो न हो, अग्रिम उसे अपने घर ले जाने के लिए आया था। क्या आज वह उससे शादी करेगा? लेकिन उसने प्रपोज तो किया ही नहीं? उसे कैसे पता कि शायद मैं भी यही चाह रही थी… घरवालों को भी अग्रिम पसंद है तो शायद वो ऐतराज भी न करें… न जाने कितने सवाल-जवाब पीहू ने अपने आप से कर लिए थे।

पीहू के नीचे आते ही अग्रिम ने उसके घरवालों को हाथ जोड़े और बोला कि मैं आपको कॉल करता हूं। कार में बैठकर अग्रिम ने कहा कि हम शादी करने जा रहे हैं, लेकिन मैंने घरवालों को बोला है कि हमको एक शादी अटेंड करनी है। पीहू इसके आगे कुछ सुन नहीं सकी। उसके कानों और दिमाग में कई धुनें एकसाथ बजने लगी थीं।

पीहू के मन में एक सवाल और गिल्ट तो था कि जो बीजू के साथ था, वो क्या था? क्या वो जबरदस्ती रिश्ता निभाने की कोशिश थी? अग्रिम के साथ जो उसने फील किया है, क्या वह सच में प्यार है? या ये जिस एनर्जी के साथ शुरू हुआ है, उसी ग्रैविटी के साथ खत्म तो नहीं हो जाएगा?

गाड़ी रुकने तक वह जिस मुकाम पर पहुंची थी, वो ये था कि सफल रिश्तों की इमारत असल में असफल रिश्तों की बुनियाद पर ही खड़ी होती है। असफल रिश्ते ही हमें सबसे करीने से सिखाते हैं कि कोई रिश्ता कैसे सफल होगा। और बीजू के साथ उसका रिश्ता असफल था, अग्रिम के साथ उसे पूरी जिंदगी का सफर तय करना है।

लेकिन ये क्या? यहां बीजू क्या कर रहा है और यह भी शेरवानी में क्यों है? पीहू के कार से नीचे पैर रखते ही बीजू ने आंखों में आंसू लिए उसे बाहों में भर लिया और कहने लगा- ‘सॉरी पीहू। मैं तुमको कॉन्टैक्ट नहीं कर सका। उस दिन पापा को हार्ट अटैक की खबर मिली तो मैं सीधा घर के लिए निकल गया था।

मुझे कुछ भी होश नहीं था। वो तो अग्रिम मेरे घर तक आया और उसने मुझे तुम्हारी कंडिशन के बारे में बताया और पूछा कि पीहू से शादी करनी है या नहीं? तुम्हें तो पता है, मुझे हमेशा से तुमसे शादी करनी थी। बस पापा की हेल्थ के चक्कर में मैं काफी डिस्टर्ब रहा, इसलिए तुमको कॉल नहीं कर पाया। आइंदा ऐसा नहीं होगा। लेकिन एक अच्छी चीज हुई कि घरवाले हमारी शादी के लिए मान गए हैं। पापा अभी ट्रैवल नहीं कर सकते और मम्मी को उनके साथ रुकना पड़ा, वरना वो यहां जरूर आते। उन्होंने हमें शादी होते ही घर बुलाया है।’

पीहू मानो आसमान से सीधे जमीन पर आ पड़ी। उसकी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये उसके साथ क्या हुआ, क्यों हुआ? उसकी नजरें अग्रिम को ढूंढ रही थीं जो आंखों में नमी लिए और उन्हें सबसे बचाते हुए सिर झुकाए पंडित जी से कुछ बात कर रहा था।

-गीतांजलि

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