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  • Gupt Navratri Is The Festival Of Meditation Of Ten Mahavidyas., Story Of Daksh Prajapati, Goddess Sati And Lord Shiva,

11 घंटे पहले

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आज माघ मास की गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। ये नवरात्रि 18 फरवरी तक चलेगी। इन नौ दिनों में देवी मां की दस महाविद्याओं की साधना विशेष साधकों द्वारा की जाती है। दसों महाविद्याएं देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई थीं। सामान्य लोगों को गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, दस महाविद्याओं की उत्पत्ति से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। जानिए ये कथा…

दस महाविद्याओं की उत्पत्ति की कथा

देवी सती के पिता प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ आयोजित किया था। यज्ञ में शिव जी को छोड़कर सभी देवी-देवता, ऋषि मुनि बुलाए गए थे। दरअसल, दक्ष शिव जी को अपना शत्रु मानता था और समय-समय पर शिव जी का अपमान करने का अवसर खोजता रहता था। इस इच्छा से दक्ष ने शिव जी और सती को यज्ञ में नहीं बुलाया।

देवी सती को मालूम हुआ कि पिता दक्ष यज्ञ कर रहे हैं तो देवी भी यज्ञ में जाने के लिए तैयार हो गईं। शिव जी ने सती से कहा कि हमें बिना आमंत्रण उस यज्ञ में नहीं जाना चाहिए।

सती ने तर्क दिया कि पिता के यहां जाने के लिए किसी आमंत्रण की जरूरत नहीं है। शिव जी ने देवी को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन देवी सती नहीं मानीं। शिव जी बार-बार देवी को रोक रहे थे, इससे देवी हो गईं और भयंकर रूप धारण कर लिया।

शिव जी देवी को क्रोधित देखकर वहां से जाने लगे तो दसों दिशाओं से माता सती के दस अलग-अलग रूप प्रकट हो गए। इन दस रूपों को ही दस महाविद्या कहा जाता है। काली, तारा, त्रिपुरासुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुराभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला, ये दस महाविद्याओं के नाम हैं। इसके कुछ देर बाद देवी सती शांत हुईं और अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ में पहुंच गईं।

यज्ञ स्थल पर प्रजापति दक्ष ने सती के सामने ही शिव जी के लिए अपमानजनक बातें कहना शुरू कर दीं। देवी सती ये सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ कुंड में कूदकर देह त्याग दी। इसके बाद देवी मां ने पर्वत राज हिमालय के यहां पार्वती के रूप में लिया था। देवी पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए तप किया और तप से प्रसन्न होकर शिव जी ने देवी पार्वती से विवाह किया था।

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