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मुंबई43 मिनट पहले

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पिछले कारोबारी हफ्ते में HDFC बैंक का मार्केट कैप ₹60,678 करोड़ गिरा है। इस दौरान शेयर बाजार में लिस्टेड देश की टॉप-10 कंपनियों में से 6 की मार्केट वैल्यूएशन में कंबाइंड रूप से 1.73 लाख करोड़ रुपए की कमी आई है।

इस गिरावट के बाद HDFC का मार्केट कैप ₹10.93 लाख करोड़ रह गया है। एक हफ्ते पहले (3 मई) को यह 11.54 लाख करोड़ रुपए था। इसके अलावा LIC, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और ITC को भी इस दौरान गिरावट का सामना करना पड़ा है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट-कैप ₹33,270 करोड़ बढ़ा
वहीं, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर ने कारोबार के दौरान एक हफ्ते में 33,270 करोड़ रुपए अपनी मार्केट वैल्यू में जोड़ा है। अब कंपनी की वैल्यू 5.54 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

TCS, भारती एयरटेल और इंफोसिस का मार्केट कैप भी इस दौरान बढ़ा है। पिछले एक हफ्ते में शेयर बाजार में 1,361 अंक (1.84%) की गिरावट रही। हफ्ते के आखिरी दिन यह 72,664 के स्तर पर बंद हुआ था।

शुक्रवार को बाजार में तेजी रही थी
शेयर बाजार में 10 मई को तेजी रही थी। सेंसेक्स 260 अंक की तेजी के साथ 72,664 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में भी 97 अंक की तेजी देखने को मिली, ये 22,055 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 में तेजी और 9 में गिरावट देखने को मिली।

9 मई को 1000 अंक से ज्यादा गिरा था बाजार
9 मई (गुरुवार) को शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स 1062 अंक गिरकर 72,404 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में भी 345 अंक की गिरावट रही, ये 21,957 पर बंद हुआ था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 में गिरावट और 5 में तेजी देखने को मिली थी।

ऑटो को छोड़कर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सभी सेक्टर में गिरावट दिखने को मिली थी। निफ्टी ऑटो में 0.78% की तेजी रही। जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा 3.15% की गिरावट रही। FMCG में 2.47%, रियल्टी में 2.23% और मेटल में 2.87% की गिरावट रही।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?
मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर, जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, की वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की टोटल नंबर को स्टॉक की प्राइस से गुणा करके किया जाता है।

मार्केट कैप का इस्तेमाल कंपनियों के शेयरों को कैटेगराइज करने के लिए किया जाता है ताकि निवेशकों को उनके रिस्क प्रोफाइल के अनुसार उन्हें चुनने में मदद मिले। जैसे लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियां।

मार्केट कैप = (आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या) x (शेयरों की कीमत)

मार्केट कैप कैसे काम आता है?
किसी कंपनी के शेयर में मुनाफा मिलेगा या नहीं इसका अनुमान कई फैक्टर्स को देख कर लगाया जाता है। इनमें से एक फैक्टर मार्केट कैप भी होता है। निवेशक मार्केट कैप को देखकर पता लगा सकते हैं कि कंपनी कितनी बड़ी है।

कंपनी का मार्केट कैप जितना ज्यादा होता है उसे उतनी ही अच्छी कंपनी माना जाता है। डिमांड और सप्लाई के अनुसार स्टॉक की कीमतें बढ़ती और घटती है। इसलिए मार्केट कैप उस कंपनी की पब्लिक पर्सीवड वैल्यू होती है।

मार्केट कैप कैसे घटता-बढ़ता है?
मार्केट कैप के फॉर्मूले से साफ है कि कंपनी की जारी शेयरों की कुल संख्या को स्टॉक की कीमत से गुणा करके इसे निकाला जाता है। यानी अगर शेयर का भाव बढ़ेगा तो मार्केट कैप भी बढ़ेगा और शेयर का भाव घटेगा तो मार्केट कैप भी घटेगा।

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