बचपन पर भारी पूरा साल: बच्चों के लिए Zero Year रहा 2021, मोबाइल पर ही देखा कैसा होता है स्कूल

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नई दिल्ली2 घंटे पहलेलेखक: मीना

दिल्ली की पांच साल की इहा त्रिपाठी को स्कूल जाना पसंद है। जब वह मात्र तीन साल की थीं, तब अपनी बड़ी बहन का बैग उठाकर स्कूल जाने की एक्टिंग करती थीं। हालांकि, कोविड-19 की वजह से स्कूल की जर्नी ऑनलाइन क्लासेज में तब्दील हो गई। इहा कहती हैं कि मैं कभी स्कूल नहीं जा पाई। पहले मेरा दाखिला नर्सरी में हुआ फिर केजी में हुआ दोनों ही बार स्कूल नहीं जा पाई। अब घर पर ऑनलाइन पढ़ाई करती हूं। मैंने आज तक क्लासरूम नहीं देखा पर स्कूल जाने की बहुत इच्छा है। साल 2021 बच्चों की नजर में जीरो इयर रहा है। उन्होंने स्कूल, प्ले ग्राउंड्स, दोस्तों के साथ खेलना, लंच शेयर करना… बहुत कुछ मिस किया। साथ ही बचपन को जिस तरह से जिया जाता है वो उनके हाथ से छूट गया।

इहा का दाखिला ऑनलाइन हुआ और उन्होंने आज तक स्कूल नहीं देखा है।

इहा ने बस्तों के साथ स्कूल आते-जाते बच्चे देखे, लेकिन ऑनलाइन क्लासेज के चलते वे वो सारे मजे नहीं ले पाईं। इहा कहती हैं कि मुझे प्ले ग्राउंड्स में झूलना, दोस्तों के साथ केक काटना और बांटकर खाना अच्छा लगता है, लेकिन अभी दोस्त अपने घरों में हैं और मैं सभी को मिस करती हूं। अगर कुछ मिस नहीं करती तो वह है घर में मम्मी की डांट।
बच्चों की स्पोर्ट्स से बन गई दूरी
स्पोर्ट्स में दिलचस्पी रखने वाली और ताइक्वांडो में ब्राउन मेडल व जूडो में ब्राउन बेल्ट हासिल करने वाली सात साल की गीवा कहती हैं कि कोविड की वजह से मुझे नोएडा शिफ्ट होना पड़ा, जिस वजह से मेरी बरेली में चलने वाली ताइक्वांडो की क्लासिस भी छूट गईं। मेरी साइकिल भी वहीं रह गई। सारी आउटडोर एक्टिविटीज रुक गईं। मुझे दोस्तों के बीच जोक क्रैक करना पसंद है, लेकिन अभी इस साल मैं ऐसा कुछ नहीं कर पाई। दोस्तों की कमी की वजह से मैं बर्थडे तक नहीं मना पाई।

घर में रहने के कारण गीवा का स्पोर्ट्स भी छूट गया।

घर में रहने के कारण गीवा का स्पोर्ट्स भी छूट गया।

जयपुर के रहने वाले 11वीं क्लास के स्टूडेंट अर्जुन हरीश मेहता का कहना है कि पिछले दो साल में हमारी एजुकेशन पूरी तरह से ऑनलाइन हो गई है। साइंस के स्टूडेंट के लिए घर में बैठकर पढ़ना एकदम बोरिंग होता है। स्पोर्ट्स में मुझे खास दिलचस्पी है लेकिन घर में रहने के कारण सबकुछ रुका रहा।

ऑनलाइन एजुकेशन ने अर्जुन हरीश मेहता को ज्यादा परेशान किया।

ऑनलाइन एजुकेशन ने अर्जुन हरीश मेहता को ज्यादा परेशान किया।

मास्क है मुसीबत : श्रीया
कोविड से बचने के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया, लेकिन देहरादून की श्रीया थपलियाल के लिए ये मास्क भी मुसीबत है। 6 साल की श्रीया सीनियर केजी में हैं। वे कहती हैं कि मुझे मास्क पहनना पसंद नहीं। कई बार जब मम्मी-पापा के साथ बाहर जाती हूं तो मास्क लगाना पड़ता है। मास्क से मुझे इरिटेशन होती है। बाहर जाते वक्त बीच-बीच में उसे उतार भी लेती हूं, पर डांट पड़ने पर वापस पहन लेती हूं। श्रीया चाहती हैं कि 2022 में कोविड खत्म हो जाए और हमारे स्कूल खुल जाएं, जहां वे खुलकर खेलकूद सकें।

श्रीया को मास्क लगाना पसंद नहीं है इसलिए वे चाहती हैं कि कोविड जल्दी भाग जाए।

श्रीया को मास्क लगाना पसंद नहीं है इसलिए वे चाहती हैं कि कोविड जल्दी भाग जाए।

12वीं के स्टूडेंट्स ने फेज की एंग्जायटी
लॉयन्स पब्लिक स्कूल में 12वीं के स्टूडेंट रजत कहते हैं कि यह साल मेरे लिए एंग्जायटी और डिप्रेशन का साल रहा क्योंकि मुझे जेईई का एग्जाम देना है, लेकिन हर बार डेट्स पोस्टपोन हो जाती हैं तो ऐसे में समझ नहीं आता कि मैं कब पढ़ूं और कब न पढ़ूं। पढ़ाई का पूरा टाइमटेबल बिगड़ गया है। ऑनलाइन क्लासिस में फोकस नहीं हो पाता। मन न होने की वजह से ऑनलाइन क्लासिस छोड़ भी दीं।

रजत के लिए पिछले दो साल उदासी भरे रहे हैं।

रजत के लिए पिछले दो साल उदासी भरे रहे हैं।

जब बोर्ड के एग्जाम आए तो डिप्रेस्ड होने लगा। कई बार ओवरथिंकिंग का शिकार हुआ और अक्सर ये सोचता हूं कि मेरे ही टाइम पर कोविड क्यों आया। ऑनलाइन क्लासिस में डाउट्स क्लिअर नहीं कर पाता।
स्कूल में सीखीं कल्चरल एक्टिविटीज अब सब भूल गई : समृद्धि
दिल्ली के सरकारी स्कूल में छठी में पढ़ने वाली समृद्धि सिंह और उनकी छोटी बहन हिमाद्री कहती हैं कि स्कूल में हमने जो कल्चर और डिसिप्लीन सीखा, वो अब सब भूल गए हैं। तो वहीं, स्कूल में कराई जाने वाली एक्टिविटीज भी मिस करते हैं। स्कूल के दोस्तों की भी याद आती है।

समृद्धि ने जो भी स्कूल में सीखा था अब वो भूलने लगी हैं।

समृद्धि ने जो भी स्कूल में सीखा था अब वो भूलने लगी हैं।

अथिवा ने स्कूल इंटरनेट पर ही देखा
6 साल की अथिवा शर्मा किंडन गार्डन स्कूल में जो मजे किए उन्हें याद करते हुए कहती हैं कि मेरा अब आर्मी स्कूल में ऑनलाइन हुआ हुआ है। मैंने अपने स्कूल की बिल्डिंग आज तक सिर्फ इंटरनेट पर ही देखी है। मैं अपने टीचर्स और दोस्तों को ऑनलाइन मोड से ही जानती हूं। मुझे प्यारी-प्यारी मैम और दोस्तों के साथ मिलने का, उनके साथ खाना खाने का और खेलने का मन करता है। मुझे कराटे बहुत पसंद हैं लेकिन ये सबकुछ ऑनलाइन सीखना पड़ रहा है जिसमें मुझे बिल्कुल मजा नहीं आता। कोविड से पहले मैं मम्मी-पापा के साथ मॉल जाती थी और अपनी पसंद की शॉपिंग करती थी लेकिन अब सभी को डर है कि कहीं इंफेक्शन न हो जाए इसलिए घर पर ही रहती हूं।

अथिवा को अपनी प्यारी मैम और दोस्तों से मिलने का इंतजार है।

अथिवा को अपनी प्यारी मैम और दोस्तों से मिलने का इंतजार है।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता रहती है : मुस्कान
दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली मुस्कान कहती हैं कि इस साल घर में रहते-रहते मैं बोर हो गई। पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम भी करने पड़े। मुस्कान का कहना है कि 12वीं क्लास हमारे आगे के करिअर के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन यही साल सबसे ज्यादा प्रभावित रहा।

मुस्कान को भविष्य को लेकर चिंता है।

मुस्कान को भविष्य को लेकर चिंता है।

ऑनलाइन क्लासिस में टीचर्स बहुत सारा काम भेजती हैं। ऑडियो लेक्चर ज्यादा अच्छे से समझ नहीं आते। कभी उन्हें सुनते हैं और कभी नहीं सुनते। इस वजह से पढ़ाई की सीरियसनेस भी कम हुई है। टर्म वन का पेपर ऑब्जेक्टिव होने की वजह से पेपर बहुत कठिन रहा। अब टर्म टू के लिए डर लग रहा है, लेकिन डर ये भी लग रहा है कि ओमिक्रॉन अगर बढ़ गया तो कहीं ये पेपर पोस्टपोन न हो जाए।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
दिल्ली की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि कोविड के समय में बच्चों में एंग्याटी, डिप्रेशन, लो मूड, स्ट्रेस, फ्यूचर को लेकर परेशानी, अकेली रहने की इच्छा जैसी परेशानियां सामने आई हैं। आउट डोर एक्टीविटीज कमी के कारण फिजिकल और मेंटल हेल्थ प्रभावित हुई है, जिससे उनकी ग्रोथ पर नेगेटिव असर पड़ा है। बच्चे परिवार के साथ रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। ये समस्याएं बच्चों की ग्रोथ पर हावी न हों उसके लिए जरूरी है पेरेंट्स उन्हें और ज्यादा अटेंशन दें। ताकि उनकी मेंटल हेल्थ बनी रहे।
कोविड और लॉकडाउन ने बच्चों को बचपन छिन लिया है। अब उन्हें उम्मीद है कि आने वाला साल खुशियां लेकर आएगा और कोरोना भाग जाएगा।

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