सूर्य संक्रांति: गुरुवार और 2 शुभ योग में मनेगा धनु संक्रांति पर्व, इस संयोग में स्नान-दान और पूजा से मिलेगा दुगना शुभ फल

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5 दिन पहले

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16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा। इसे धनु संक्रांति कहते हैं। गुरुवार को गुरु की ही राशि में सूर्य का आना शुभ संयोग माना जा रहा है। पंचांगों के मुताबिक ये राशि परिवर्तन 15 तारीख की रात को हो रहा है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक जब सूर्य रात में राशि बदलता है तो संक्रांति पर्व अगले दिन मनाना चाहिए। इसलिए इस पर्व का पुण्य काल 16 दिसंबर को रहेगा। यानी तीर्थ स्नान, दान और पूजा का महत्व गुरुवार को रहेगा।

बृहस्पति की राशि में प्रवेश
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि इस बार गुरुवार को सूर्य, गुरु की ही राशि में आ रहे हैं। ये दोनों ग्रह आपस में मित्र हैं। इसलिए इस बार धनु संक्रांति शुभ मानी जा रही है। साथ ही इस साल शिव और सिद्ध योग में सूर्य संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इन 2 शुभ योगों में किए गए तीर्थ स्नान, दान और पूजा-पाठ से दुगना शुभ फल मिलेगा।

सूर्य के राशि बदलने को संक्रांति कहा जाता है और जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है। ये कभी मार्गशीर्ष तो कभी पौष मास में आती है। धनु संक्रांति पर्व हेमंत ऋतु में मनाया जाता है। इसलिए इस दिन गर्म कपड़े, अन्न, कंबल, गुड़, तिल और जूते-चप्पल दान करने की परंपरा है।

पूजा विधि
1.
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं फिर उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।
2. पूजा करें और दिनभर व्रत और दान करने का संकल्प लें।
3. पीपल और तुलसी को जल चढ़ाएं। इसके बाद गाय को घास-चारा या अन्न खिलाएं।
4. जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं और कपड़े दान कर सकते हैं।
5. सूर्योदय से दो प्रहर बीतने के पहले यानी दिन में 12 बजे से पहले पितरों की शांति के लिए तर्पण करना चाहिए।

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